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CG news : हसदेव, शबरी, शिवनाथ के उद्गम स्थलों को पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी, चेतना केंद्र की भी तैयारी...

CG news : हसदेव, शबरी, शिवनाथ के उद्गम स्थलों को पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करने की तैयारी, चेतना केंद्र की भी तैयारी...


रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों के संरक्षण और उनके उद्गम स्थलों को संवारने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। 

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उच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने स्पष्ट किया कि नदियों के उद्गम स्थलों की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए इन्हें प्रमुख पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा। 

इस पहल से न केवल पर्यावरण का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।छत्तीसगढ़ समृद्ध नदी तंत्र का राज्य है। यहाँ की मुख्य नदी महानदी का उद्गम धमतरी के सिहावा पर्वत से होता है। 

इसी तरह, बस्तर की जीवनरेखा इन्द्रावती नदी उड़ीसा के कालाहांडी से निकलकर बस्तर में बहती है, जबकि शिवनाथ नदी का उद्गम पानाबरस पहाड़ी से होता है। हसदेव नदी कोरिया की पहाड़ियों से और शबरी नदी बैलाडीला की पहाड़ियों से निकलती हैं। 

वर्तमान में कई नदियों के उद्गम स्थल उपेक्षा, जलभराव की कमी, गाद जमा होने और प्रदूषण के कारण अपनी प्राकृतिक सुंदरता खो रहे हैं। जलस्तर घटने और कैचमेंट एरिया में हरियाली कम होने से इनके अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है।

इस संकट को दूर करने के लिए सरकार इन उद्गम स्थलों का कायाकल्प करने जा रही है। नई कार्ययोजना के तहत इन क्षेत्रों को सुंदर और सुव्यवस्थित पर्यटन केंद्रों में बदला जाएगा। यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाई जाएंगी, जिससे गाइड, हस्तशिल्प और स्थानीय खान-पान के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा। 

इसके साथ ही, विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक भ्रमण और नदी संरक्षण पर आधारित विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा, ताकि युवा पीढ़ी में जल चेतना जाग्रत हो।मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को हाई कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक काम करने के निर्देश दिए हैं। 

नदियों के कैचमेंट एरिया में बड़े पैमाने पर पौधारोपण, भू-जल पुनर्भरण (वाटर रिचार्जिंग) और नई जल संरचनाओं का निर्माण किया जाएगा। नदियों में शहरों और उद्योगों के अपशिष्ट पदार्थों के प्रवाह को रोकने के लिए एक सतत निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी। 

इस बैठक में एनआइटी के विशेषज्ञों और तकनीकी सलाहकारों ने भी हिस्सा लिया, जिन्होंने नदी संवर्धन और पर्यावरण सुरक्षा पर अपनी महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ दीं।



Edited by k.s thakur...

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