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CG news : चेहरे पर धूल, ऐप पर धोखा खा रहे, MNREGA मजदूर, चेहरे की पहचान न होने से कट रही राज्य में हाजिरी...

CG news : चेहरे पर धूल, ऐप पर धोखा खा रहे, MNREGA मजदूर, चेहरे की पहचान न होने से कट रही राज्य में हाजिरी...


देवभोग : ग्रामीण क्षेत्रों में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार व फर्जी हाजिरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में लागू किया गया नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) एप अब जमीनी स्तर पर हजारों श्रमिकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुका है। 

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दो महीने तक घरों में बैठने के बाद सरकार द्वारा रोजगार उपलब्ध कराए जाने से ग्रामीणों में भारी उत्साह था, लेकिन एप की तकनीकी खामियों ने उनके इस उत्साह पर पानी फेर दिया है। 

स्थिति यह है कि कई मजदूर बार-बार मुंह धोने और चेहरा साफ करने के बाद भी कैमरे के सामने अपनी पहचान प्रमाणित नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं हो रही और उन्हें कार्यस्थल से मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।

देवभोग ब्लॉक में मनरेगा के तहत 28 हजार से अधिक जॉब कार्डधारी श्रमिक हैं। वर्तमान में लगभग सभी पंचायतों में काम चल रहा है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रतिदिन 15 से 16 हजार श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की जा रही है। 

नियमों के मुताबिक, श्रमिकों को दिन में दो बार फोटो आधारित एप के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होती है—पहली काम शुरू होने पर और दूसरी दोपहर के बाद। इस प्रक्रिया में फोटो के साथ लोकेशन और समय अपने आप पोर्टल पर अपलोड हो जाता है। 

हालांकि, अधिकांश ग्रामीणों का कहना है कि कमजोर इंटरनेट नेटवर्क, चेहरे के मिलान में तकनीकी दिक्कत और एप के सर्वर में खराबी के चलते 100 में से केवल 60 से 70 श्रमिकों की ही फोटो अपलोड हो पाती है।

इस समस्या से परेशान होकर जिन श्रमिकों का फोटो मैच नहीं हो रहा है, वे ई-केवाईसी (e-KYC) कराने के लिए चॉइस सेंटरों और लोक सेवा केंद्रों की ओर दौड़ रहे हैं। 

वहां भी भारी भीड़ के कारण उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और इस काम के एवज में उनसे 150 से 200 रुपये तक की अवैध मांग की जा रही है, जिससे गरीब मजदूरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

बुजुर्ग मजदूरों केलिए विकसित कर रहे साफ्यवेयर : 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग श्रमिकों की इस समस्या के समाधान के लिए छत्तीसगढ़ शासन अलग सॉफ्टवेयर विकसित कर रहा है। दिव्यांगों के लिए पंचायत का प्रमाणपत्र अपलोड करने की व्यवस्था की जा रही है। 

मौजूदा एप को अपडेट करने की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही तकनीकी कमियों को दूर कर लिया जाएगा। अस्थायी रूप से पलायन कर चुके ग्रामीणों को भी पंचायतों के माध्यम से बुलाकर ई-केवाईसी कराने के निर्देश दिए गए हैं। – बुद्धेश्वर साहू, सहायक परियोजना अधिकारी-गरियाबंद।




Edited by k.s thakur...

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