भारतीय वायुसेना के रक्षक 'गरुड़' कमांडो को अब मिलेगी नई 'ड्रोन' ताकत, अत्याधुनिक माइक्रो यूएवी सिस्टम से होगा लैस...
नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना के 'गरुड़' स्पेशल फोर्सेज, जो अपने अदम्य साहस और कठिन से कठिन परिस्थितियों में दुश्मन को धूल चटाने के लिए जाने जाते हैं, अब और भी अधिक सशक्त होने जा रहे हैं।
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देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के संकल्प के साथ, सरकार ने इन जांबाजों के लिए अत्याधुनिक 'माइक्रो यूएवी' सिस्टम की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है।यह केवल एक उपकरण नहीं, बल्कि हमारे सैनिकों की सुरक्षा और सामरिक श्रेष्ठता के लिए एक बड़ा सुरक्षा कवच होगा।
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हर परिस्थिति में अचूक निशाना और निगरानी यह नया ड्रोन सिस्टम बेहद खास है, जिसे विशेष रूप से ऊंचाई वाले इलाकों और विषम जलवायु के लिए डिजाइन किया जा रहा है।ये ड्रोन शून्य से 20 डिग्री सेल्सियस नीचे से लेकर 50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में काम करने में सक्षम होंगे और 16,400 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेंगे।
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इस सिस्टम की तकनीकी खासियतें..
इसे युद्धक्षेत्र में गेम-चेंजर बनाती हैं। कम से कम 15 किलोमीटर की रेंज और 60 मिनट तक हवा में टिके रहने की क्षमता के साथ, यह ड्रोन रियल-टाइम निगरानी और टारगेट एक्विजिशन में माहिर होगा।
दो सैनिकों द्वारा आसानी से ले जाए जाने वाला यह 'मैन-पोर्टेबल' सिस्टम स्वायत्त, मैनुअल और टारगेट ट्रैकिंग जैसे कई मोड्स में काम करेगा। जीपीएस-डिनोइड वातावरण और सुरक्षित एन्कि्रप्टेड कम्युनिकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत होगी।
'मेक इन इंडिया' की ओर एक और बड़ा कदम..
यह परियोजना न केवल भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमताओं को नई ऊंचाई देगी, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' के सपने को भी साकार करेगी। रक्षा मंत्रालय का यह प्रयास स्पष्ट करता है कि भारत अब विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम कर स्वदेशी रक्षा निर्माण को प्राथमिकता दे रहा है।
यह माइक्रो यूएवी सिस्टम वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग जैसी आधुनिक क्षमताओं से लैस होगा। 'जब हमारे गरुड़ कमांडो सरहद की रक्षा के लिए दुर्गम चोटियों पर तैनात होंगे, तो आसमान में उड़ता यह 'स्वदेशी प्रहरी' उनकी आंख बनकर दुश्मन की हर हरकत को पल भर में भांप लेगा। यह पहल हमारे सैनिकों के साहस को तकनीक का सुरक्षा कवच प्रदान करने की एक सराहनीय कोशिश है।'
Edited by k.s thakur...





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