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ताइवान ने लगे भारत विरोधी पोस्टर: इलैक्शन उम्मीदवार की शर्मनाक टिप्पणी- भारतीय मजदूरों को मत लाओ वे...

ताइवान ने लगे भारत विरोधी पोस्टर: इलैक्शन उम्मीदवार की शर्मनाक टिप्पणी- भारतीय मजदूरों को मत लाओ वे...


New delhi :  ताइवान  में स्थानीय चुनाव के दौरान भारतीयों को लेकर विवादित पोस्टर सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। एक निर्दलीय उम्मीदवार ने ऐसा पोस्टर लगाया जिसमें पगड़ी पहने एक सिख व्यक्ति की तस्वीर पर बड़ा “NO” का निशान बनाया गया था। 

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पोस्टर में भारतीय प्रवासी मजदूरों का विरोध करते हुए उन्हें अपराधी बताया गया। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और ताइवान के बीच हुए श्रम सहयोग समझौते के तहत भारतीय कामगारों को ताइवान भेजने की तैयारी चल रही है। 

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इस समझौते के तहत इस साल के अंत तक करीब 1000 भारतीय मजदूर ताइवान पहुंच सकते हैं। ताइवान की विपक्षी पार्टी Kuomintang (KMT) के कुछ नेताओं ने भी भारतीय मजदूरों को लेकर चिंता जताई है।

सांसद हुआंग चिएन-पिन ने भारत के अपराध संबंधी आंकड़ों का हवाला देते हुए संसद में कहा कि भारतीय कामगारों की सख्त जांच और निगरानी होनी चाहिए। उनके बयान को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। 

ताइवान में रहने वाले भारतीयों और कई स्थानीय नेताओं ने इन पोस्टरों और बयानों को नस्लीय भेदभाव बताया है। आलोचकों का कहना है कि किसी नीति का विरोध अलग बात है, लेकिन किसी समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को निशाना बनाना गलत है। New Power Party के नेता वांग यी-हेंग ने कहा कि पगड़ी केवल कपड़ा नहीं बल्कि सिख आस्था और सम्मान का प्रतीक है।

उन्होंने पोस्टर को अज्ञानता और भेदभाव से भरा कदम बताया।ताइवान में फिलहाल करीब 7000 भारतीय रहते हैं, जिनमें अधिकतर हाई-टेक और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में काम करते हैं। कई भारतीय पेशेवर Foxconn और TSMC जैसी बड़ी कंपनियों से जुड़े हुए हैं। 

दरअसल ताइवान लंबे समय से श्रमिक संकट का सामना कर रहा है। वहां जन्म दर घट रही है और बुजुर्ग आबादी बढ़ रही है। इसी वजह से ताइवान पहले से इंडोनेशिया, वियतनाम, फिलीपींस और थाईलैंड से मजदूर बुलाता रहा है। अब भारत को भी इस सूची में शामिल किया गया है।

हालांकि ताइवान में “फ्यूजिटिव वर्कर्स” यानी काम छोड़कर अवैध रूप से रहने वाले विदेशी मजदूरों की समस्या को लेकर भी चिंता है। कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि विदेशी श्रमिकों पर सख्त निगरानी जरूरी है। 

इससे पहले भी विवाद हुआ था जब ताइवान की पूर्व श्रम मंत्री हसू मिंग-चुन ने कहा था कि शुरुआत में भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों से मजदूर बुलाए जा सकते हैं क्योंकि उनकी जीवनशैली और खानपान ताइवान से ज्यादा मेल खाते हैं। इस बयान की भी नस्लवादी टिप्पणी के रूप में आलोचना हुई थी, जिसके बाद ताइवान सरकार को माफी मांगनी पड़ी थी।




Edited by k.s thakur...

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