बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा? सीएम सम्राट ने पीएम मोदी से की मुलाकात, विकास के रोडमैप पर हुई बात...

बिहार मंत्रिमंडल का विस्तार कब होगा? सीएम सम्राट ने पीएम मोदी से की मुलाकात, विकास के रोडमैप पर हुई बात...


नई दिल्ली। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद अब अगला बड़ा कदम मंत्रिमंडल विस्तार का है, जिसकी पटकथा लगभग तैयार कर ली गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मुलाकात के बाद संकेत साफ है कि बिहार में जल्द ही सरकार का विस्तार हो सकता है।

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दोनों शीर्ष नेताओं के बीच विमर्श का ब्योरा तो सामने नहीं आया है, मगर माना जा रहा है कि इस दौरान नई सरकार की रूपरेखा तय कर ली गई है और बंगाल चुनाव के बाद कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया जाएगा।

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दस दिनों के भीतर पूरी सरकार का गठन..

सूत्रों ने बताया कि दस दिनों के भीतर पूरी सरकार का गठन कर लिया जाएगा। यह भी स्पष्ट है कि केंद्रीय नेतृत्व बिहार में सम्राट के नेतृत्व में नई सरकार को तेजी से स्थिर एवं प्रभावी बनाना चाहता है। मुख्यमंत्री बनने के छह दिन बाद पहली बार दिल्ली पहुंचे सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री के साथ राज्य के विकास रोडमैप और शासन की प्राथमिकताओं पर विस्तृत चर्चा की।
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यह मुलाकात इसलिए भी अहम रही क्योंकि फिलहाल राज्य में मुख्यमंत्री समेत केवल तीन मंत्री ही शपथ ले पाए हैं। ऐसे में प्रशासनिक कामकाज को गति देने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार अब अनिवार्य कदम बन गया है। मुलाकात के बाद दोनों नेताओं ने इंटरनेट मीडिया पर तस्वीरें शेयर की हैं।

सम्राट चौधरी ने पीएम मोदी से की मुलाकात..

सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा है कि प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट हुई। राज्य के समग्र विकास और जनकल्याण के विषय पर चर्चा करते हुए मार्गदर्शन मिला। प्रधानमंत्री का स्नेह और सहयोग बिहार की प्रगति को नई गति प्रदान करेगा।

सरकार विस्तार को लेकर भाजपा नेतृत्व दी सहमति..

सूत्रों के अनुसार सरकार विस्तार को लेकर भाजपा नेतृत्व अपनी सहमति दे चुका है और अब अंतिम औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। इसी क्रम में सम्राट चौधरी ने दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से भी पार्टी मुख्यालय जाकर मुलाकात की। संकेत है कि पार्टी और सरकार के बीच तालमेल बैठाते हुए संभावित मंत्रियों के नामों पर लगभग सहमति बन चुकी है।

राजनीतिक नजरिए से मंत्रिमंडल विस्तार बेहद अहम..

राजनीतिक नजरिए से मंत्रिमंडल विस्तार को इसलिए अहम माना जा रहा है कि पहली बार भाजपा के नेतृत्व में बनी बिहार सरकार के सामने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की चुनौती है। इसी वजह से मंत्रिमंडल में जातीय समीकरण, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक संदेश पर जोर दिया जा रहा है।

पार्टी युवा चेहरों को आगे बढ़ाकर संगठन में नई ऊर्जा लाने और महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर भी काम कर रही है, ताकि व्यापक सामाजिक संदेश दिया जा सके।

मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए विजन को जमीन पर उतारने की तैयारी..

करीब दो दशक तक बिहार की राजनीति को दिशा देने वाले नीतीश कुमार के दौर के बाद यह बदलाव केवल नेतृत्व परिवर्तन तक सीमित नहीं है, बल्कि नीतीश कुमार के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए शासन शैली में स्थिरता लाने का संकेत है।

बिहार में भाजपा अब तक सरकार की सहयोगी की भूमिका में थी, जो अब पूरी तरह नेतृत्व की स्थिति में है और मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए अपने विजन को जमीन पर उतारने की तैयारी कर रही है।

सम्राट चौधरी की हालिया राजनीतिक सक्रियता भी इसी दिशा की ओर इशारा करती है। दिल्ली रवाना होने से पहले पटना में जदयू के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से उनकी मुलाकात से साफ है कि गठबंधन के भीतर तालमेल बनाए रखने की कोशिश भी समानांतर रूप से जारी रहेगा।

जाहिर है, मंत्रिमंडल विस्तार सिर्फ संख्या बढ़ाने का कदम नहीं होगा, बल्कि इससे सरकार की प्राथमिकताओं, सामाजिक संदेश और आने वाले राजनीतिक एजेंडे की झलक भी मिलेगी। इस लिहाज से अगले दस दिन राज्य की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।



Edited by k.s thakur...

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