New delhi : ईरान पर हमले के बीच भारत के मेहमान बने कनाडाई पीएम कार्नी, कड़वाहट भूल नई दोस्ती का आगाज...
New delhi : कनाडा के नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत आए, पीएम मोदी से मुलाकात की. ट्रंप के टैरिफ के बाद कनाडा भारत से दोस्ती बढ़ा रहा है, व्यापार 70 बिलियन डॉलर तक ले जाने की तैयारी.
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सोचिए, आपका एक बहुत बड़ा कारोबार है. लेकिन आपका 75% माल सिर्फ एक ही ग्राहक खरीदता है. सालों से सब कुछ बढ़िया चल रहा था. लेकिन अचानक, वह ग्राहक बदल जाता है. वह गुंडागर्दी पर उतर आता है, कहता है कि अब मैं तुम्हारा माल नहीं खरीदूंगा, और अगर बेचना है तो मुझे भारी टैक्स देना पड़ेगा. आप क्या करेंगे?
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आप घबराएंगे और तुरंत बाजार में एक नया, भरोसेमंद और बड़ा ग्राहक ढूंढने निकलेंगे. बस, दुनिया की राजनीति में आज कनाडा के साथ बिल्कुल यही हो रहा है. इसीलिए सारी कड़वाहट भूलकर कनाडा के भारत आए हैं, ताकि नई दोस्ती का आगाज हो सके.
मार्क कार्नी रविवार शाम दिल्ली पहुंचे. सोमवार को उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हो सकती है. आपको याद होगा, कुछ समय पहले कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत के साथ कैसा बर्ताव किया था. उन्होंने निज्जर मर्डर केस में बिना सबूत भारत पर आरोप मढ़ दिए थे.
इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजदूतों को निकाल दिया था, वीज़ा बंद हो गए थे और रिश्ते पूरी तरह से गर्त में चले गए थे. लेकिन राजनीति में कोई सगा नहीं होता, सिर्फ फायदा देखा जाता है. जब ट्रूडो की कुर्सी गई और मार्क कार्नी नए प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने सबसे पहला काम क्या किया? उन्होंने पीएम मोदी को फोन घुमाया. पीएम मोदी ने भी पुरानी बातों पर मिट्टी डाली और दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया. फिर क्या था रिश्ता चल निकला.
कनाडा को किस बात की टेंशन...
कनाडा और अमेरिका पड़ोसी हैं. कनाडा अपना 75% से ज्यादा सामान और लगभग पूरी बिजली/गैस अमेरिका को बेचता है. जब तक वहां जो बाइडेन थे, सब ठीक था. लेकिन जैसे ही डोनाल्ड ट्रंप की वापसी हुई, उन्होंने पुराना वर्ल्ड ऑर्डर तोड़ दिया. ट्रंप ने कनाडाई सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिया. कनाडा को समझ आ गया कि जिस अमेरिका के भरोसे वो अब तक था, उसने तो रातों-रात मुंह फेर लिया.
अब अगर कनाडा को अपनी अर्थव्यवस्था बचानी है, तो उसे अमेरिका से अपनी निर्भरता खत्म करनी होगी. और इसके लिए उसे एक ऐसा देश चाहिए जो बहुत बड़ा हो, तेजी से तरक्की कर रहा हो और जो अमेरिका के दबाव में न आए. वो देश है- भारत.
पीएम मोदी का ‘मास्टरस्ट्रोक’...
इस पूरी कहानी में पीएम मोदी की पिछले 10 साल की कूटनीति ‘सुपरहिट’ साबित हुई है. जब रूस और यूक्रेन लड़ रहे थे, तो अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया कि रूस से तेल मत खरीदो. लेकिन मोदी ने साफ कह दिया, हम अपने लोगों का फायदा देखेंगे.
भारत ने सस्ता रूसी तेल भी खरीदा और अमेरिका से भी दोस्ती पक्की रखी. इसे कहते हैं ‘स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी’ यानी यानी किसी गुट के साथ न जाना, अपने फैसले खुद लेना. आज जब ट्रंप की हरकतों से दुनिया के कई देश घबराए हुए हैं, तो उन्हें भारत में एक ‘भाई’ नजर आ रहा है.
Edited by k.s thakur...




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