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ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े को नष्ट करना अमेरिका-इजरायल के लिए चुनौती, चीन-रूस की होगी एंट्री?

ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल बेड़े को नष्ट करना अमेरिका-इजरायल के लिए चुनौती, चीन-रूस की होगी एंट्री? 


नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में घोषणा की है कि ईरान पर जारी हमलों का मुख्य उद्देश्य उसके बैलिस्टिक मिसाइल नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना है। मगर, रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य अधिकारियों का मानना है कि ईरान के विशाल शस्त्रागार और उत्पादन केंद्रों को पूरी तरह मिटाना उम्मीद से कहीं अधिक कठिन साबित हो सकता है।

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शनिवार से शुरू हुए संयुक्त हमलों के बावजूद, ईरान की भूमिगत सुविधाओं और उसकी तकनीकी क्षमता ने मित्र देशों की चिंता बढ़ा दी है। भूमिगत नेटवर्क और तस्करी की रणनीति ईरान ने पिछले कई दशकों में पश्चिम एशिया का सबसे बड़ा और विविध मिसाइल शस्त्रागार तैयार किया है।

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बी-2 स्टील्थ बाम्बर्स से हमला...

  • अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान ने अपनी मिसाइल उत्पादन इकाइयों और भंडार को जमीन के भीतर 'अत्यंत सुरक्षित' ठिकानों में रखा है। हाल ही में इन ठिकानों पर बी-2 स्टील्थ बाम्बर्स से दो हजार पाउंड के बम गिराए गए।
  • लेकिन, ज्वाइंट चीफ्स आफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने स्वीकार किया कि ये साइटें काफी गहराई में स्थित हैं। इसके अलावा, ईरान की एक बड़ी ताकत उसकी 'डिसेम्बलिंग' तकनीक है।
  • वह अपनी मिसाइलों को छोटे हिस्सों में बांटकर आसानी से तस्करी करता है और अपने प्राक्सी संगठनों (जैसे यमन के हूती विद्रोही) तक पहुंचा देता है, जहां इन्हें दोबारा जोड़ लिया जाता है। इस कारण केवल हवाई हमलों से इस नेटवर्क को खत्म करना असंभव सा लगता है।

दूर तक मार करने वाली मिसाइलें..

विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए जमीनी स्तर पर 'स्पेशल फोर्सेस' के निरीक्षण की आवश्यकता पड़ सकती है। मिसाइल क्षमता और ऐतिहासिक संदर्भ डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (डीआइए) की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास कम दूरी (30-190 मील), छोटी दूरी (190-620 मील) और मध्यम दूरी (1,240 मील) तक मार करने वाली मिसाइलें हैं।
  • शाहब-3 जैसी मिसाइलें 1,200 मील दूर तक लक्ष्य भेद सकती हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान द्वारा इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आइसीबीएम) विकसित करने की आशंका जताई है, हालांकि खुफिया आकलन के अनुसार ईरान अभी इस तकनीक से कम से कम एक दशक दूर है।
  • गौरतलब है कि 1991 के 'डेजर्ट स्टार्म' आपरेशन के दौरान भी अमेरिका ने इराक की 'स्कड' मिसाइलों को खोजने की कोशिश की थी, लेकिन वह मिशन बहुत कम सफल रहा था।

हमले जारी रहेंगे: मार्को रुबियो..

इतिहास गवाह है कि केवल आसमान से मिसाइल हन्टिनग करना सटीक परिणाम नहीं देता। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान के लगभग 200 लांचर नष्ट कर दिए हैं, लेकिन ईरान की ओर से मिसाइल दागने का सिलसिला अब भी जारी है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि जब तक सैन्य लक्ष्य पूरे नहीं होते, हमले जारी रहेंगे।





Edited by k.s thakur...

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