Govt schemes : मुफ्त गैस से लेकर सालाना ₹6000 तक... सरकार की इन योजनाओं का उठाएं लाभ, डायरेक्ट जेब में आएगा पैसा!
New delhi। भारत को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लागू की गई कई महत्वाकांक्षी सरकारी योजनाओं ने जमीनी स्तर पर बड़े बदलाव दिखाए हैं।
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बैंकिंग सुधारों से लेकर घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और ग्रामीण विकास तक, इन पहलों ने न केवल देश की आर्थिक दिशा को नई गति दी है, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर को भी बेहतर बनाया है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि..
देश के किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए पीएम-किसान योजना एक मजबूत ढाल बनकर उभरी है। इस योजना के अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को खेती-किसानी की जरूरतों के लिए सालाना ₹6,000 की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है।
यह राशि तीन समान किस्तों में ट्रांसफर की जाती है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए नए किसान पीएम-किसान पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन या अपने नजदीकी कृषि विभाग और कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आसानी से पंजीकरण करा सकते हैं।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना..
ग्रामीण और वंचित परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ ईंधन प्रदान करने के उद्देश्य से साल 2016 में उज्ज्वला योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी (LPG) कनेक्शन उपलब्ध कराए गए, जिसका आंकड़ा अब 10 करोड़ को पार कर चुका है।
सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को चूल्हे के धुएं से मुक्ति मिली है, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ है और ग्रामीण जीवन स्तर अधिक सुरक्षित और आधुनिक बना है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना..
वर्ष 2015 में लॉन्च की गई माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा) योजना ने देश के छोटे और मंझोले कारोबारियों की सबसे बड़ी चिंता बिना गारंटी के लोन की समस्या को दूर किया।
इस योजना के अंतर्गत नए स्टार्टअप्स, रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे दुकानदारों को अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए लाखों रुपये तक का ऋण आसानी से उपलब्ध कराया जाता है। अब तक स्वीकृत किए जा चुके करोड़ों ऋणों ने देश में स्वरोजगार और नए उद्यमियों की एक नई फौज खड़ी कर दी है।
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (PLI) योजना..
देश की विनिर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव (PLI) योजना लेकर आई। लगभग ₹1.97 लाख करोड़ के भारी-भरकम प्रोत्साहन बजट वाली यह महत्वाकांक्षी योजना वर्तमान में 14 प्रमुख क्षेत्रों (सेक्टरों) में सफलतापूर्वक संचालित हो रही है।
इसके आने से मोबाइल फोन, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स और कपड़ा (टेक्सटाइल) जैसे उद्योगों में न केवल घरेलू उत्पादन तेजी से बढ़ा है, बल्कि भारत से होने वाले निर्यात में भी रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रधानमंत्री जन धन योजना..
साल 2014 में शुरू की गई इस दूरदर्शी पहल का मुख्य उद्देश्य देश के हर परिवार को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना था। शून्य शेष (जीरो बैलेंस) पर खुलने वाले इन खातों के जरिए करोड़ों नागरिकों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग के दायरे में लाया गया।
इस योजना ने न केवल लोगों में बचत की आदत डाली, बल्कि दुर्घटना बीमा, पेंशन और सबसे महत्वपूर्ण— सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की सब्सिडी को सीधे लाभार्थियों के खातों में (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) पहुंचाकर भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने का काम किया।
'मेक इन इंडिया' पहल..
भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब) के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ इस अभियान की शुरुआत की गई थी। इसके तहत देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, नए निवेश को आकर्षित करने और कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) पर विशेष ध्यान दिया गया।
करीब 25 प्रमुख क्षेत्रों में व्यापार करने के नियमों को सरल बनाकर और औद्योगिक सुधारों को लागू करके घरेलू उत्पादन को एक नया मुकाम दिया गया है।
इन सभी योजनाओं में सरकार द्वारा किया गया व्यापक निवेश महज कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। बैंकिंग क्षेत्र में आई क्रांति, घरेलू उद्योगों की बढ़ती रफ्तार, अत्याधुनिक तकनीक में भारत की बढ़ती धमक और समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक सीधे पहुंच रहे लाभ के रूप में इसके परिणाम आज धरातल पर साफ नजर आ रहे हैं।
Edited by k.s thakur...



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