MP news : इंदौर में किसानों का गुस्सा फूटा, गेहूं खरीदी में देरी और सख्ती के खिलाफ कलेक्ट्रेट का किया घेराव...
इंदौर : सरकार की नीतियों और प्रशासनिक ढिलाई से नाराज किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। इस बार विरोध की अगुवाई सरकार समर्थित माने जाने वाले भारतीय किसान संघ ने की, जिससे मामला और ज्यादा गंभीर हो गया है।
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सोमवार को बड़ी संख्या में किसानों ने कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर अपर कलेक्टर रोशन राय को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप है कि सरकार एक ओर उनकी आय बढ़ाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर नीतियों में देरी और असंगत फैसलों से उन्हें आर्थिक संकट में धकेल रही है।
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संघ के इंदौर महानगर अध्यक्ष दिलीप मुकाती का कहना है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी की तारीख बार-बार बढ़ाने से किसान परेशान हैं। खरीदी में देरी के कारण जहां एक ओर फसल का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ता जा रहा है।
इसके साथ ही सहकारी बैंकों की ऋण अदायगी की समय सीमा नहीं बढ़ाने से हजारों किसान डिफॉल्टर हो गए हैं, जिन पर भारी ब्याज और पेनल्टी का बोझ पड़ रहा है। सरकार को ऋण जमा करने की तारीख को आगे बढ़ाना चाहिए।
भारतीय किसान संघ जिला इंदौर के महानगर मंत्री वरदराज जमीदार का कहना है कि प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर किसानों पर प्रकरण दर्ज किया जा रहा है, जबकि सरकार पराली जलाने का स्थाई विकल्प उपलब्ध नहीं करा पा रही है। ऐसे में किसानों पर प्रकरण दर्ज करना अन्यायपूर्ण है।
किसानों के बीच सबसे अधिक नाराजगी पराली जलाने पर दर्ज हो रही एफआईआर को लेकर है।भारतीय किसान संघ के संभागीय अध्यक्ष कृष्णपाल सिंह का कहना है कि विभिन्न मांगों को लेकर किसानों ने इंदौर और उज्जैन संभाग के 105 तहसील मुख्यालयों पर ज्ञापन सौंपा है।
इंदौर में भी पांच तहसील मुख्यालय पर ज्ञापन सौंपे गए। यदि किसानों पर प्रकरण दर्ज करने की कार्रवाई नहीं रुकी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।गेहूं की नरवाई जलाना पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा बनता जा रहा है।
इससे भारी मात्रा में धुआं निकलता है, जिससे कार्बन डाइआक्साइड, कार्बन मोनोआक्साइड और सूक्ष्म कण होते हैं, जो सांस संबंधी बीमारियों को बढ़ाते है। नरवाई जलाने से मिट्टी की ऊपरी सतह के पोषक तत्व नाइट्रोजन और फास्फोरस भी नष्ट हो जाते है और उर्वरकता घटती है।
वायु प्रदूषण भी बढ़ता है। इस कारण प्रशासन जलाने की प्रक्रिया रोकने के लिए एफआईआर जैसी कार्रवाई करता है, ताकि किसान वैकल्पिक उपाय अपनाएं ।संघ के इंदौर महानगर अध्यक्ष दिलीप मुकाती का कहना है कि किसानों पर सख्ती की अपेक्षा जागरूकता से इसका रोकना चाहिए।
कम समय में अगली फसल बोने की मजबूरी और मशीनों की कमी के कारण किसान अन्य विकल्प नहीं चुनते है। कई किसान आर्थिक कारणों से सस्ती और आसान विधि के रूप में नरवाई जलाना चुनते हैं।
छोटे किसानों के पास मशीनें नहीं होती और किराए पर कार्य कराने से लागत बढ़ जाती है। यदि किसानों को उचित प्रशिक्षण, सब्सिडी और वैकल्पिक तकनीक उपलब्ध कराई जाएं, तो वह अन्य तरीकों की तरफ बढ़ेंगे।
Edited by k.s thakur...




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