US- Iran war :अगर जारी रहा अमेरिका-ईरान युद्ध को दुनिया में पैदा हो जाएगी भुखमरी, क्या है वजह?
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य के संभावित बंद होने से वैश्विक खाद्य सुरक्षा खतरे में है। फारस की खाड़ी से आने वाले नाइट्रोजन उर्वरकों की आपूर्ति बाधित होने से किसानों के लिए लागत बढ़ेगी, जिससे खाद्य उत्पादन कम हो सकता है।
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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया का संघर्ष जितना लंबा खिंचेगा, दुनियाभर में लोगों को भोजन के लिए अधिक कीमत चुकाने की आशंका उतनी ही बढ़ जाएगी। सबसे अधिक असुरक्षित देशों में रहने वाले लोगों को भुखमरी का सामना करना पड़ सकता है। फारस की खाड़ी उर्वरक का एक प्रमुख स्त्रोत है।
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हालांकि, यह क्षेत्र तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल स्त्रोत के रूप में जाना जाता है। लेकिन, ऊर्जा की प्रचुरता ने कई प्रकार के उर्वरकों, विशेष रूप से नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों के लिए कच्चा माल बनाने वाले कारखानों को बढ़ावा दिया है। नाइट्रोजन उर्वरक मूलत: प्राकृतिक गैस को पौधों के पोषक तत्वों में बदलकर बनाए जाते हैं।
अधिकांश कारखानों में उत्पादन जारी..
ये उन फसलों को पोषण देते हैं, जिनसे विश्व की लगभग आधी खाद्य आपूर्ति प्राप्त होती है। फिलहाल, फारस की खाड़ी में नाइट्रोजन उर्वरक बनाने वाले अधिकांश कारखानों में इनका उत्पादन जारी है। लेकिन, होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद हो जाने के कारण किसानों तक इन उर्वरकों की आपूर्ति करना अचानक मुश्किल हो गया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को हिंद महासागर से जोड़ता है। जलडमरूमध्य के जरिये समुद्री यातायात बंद होने से तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। यदि जलमार्ग बंद रहता है, तो प्रमुख उर्वरकों और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतें बढ़ जाएंगी। इससे किसान इनका उपयोग सीमित कर सकते हैं, जिससे विश्व की खाद्य आपूर्ति कम हो जाएगी और जीवनयापन महंगा हो जाएगा।
रूस-यूक्रेन युद्ध का दिखा था असर..
लंदन स्थित कमोडिटी अनुसंधान और डाटा फर्म सीआरयू ग्रुप में कीमत मामलों के उपाध्यक्ष क्रिस लॉसन ने कहा कि यह बहुत बुरा है। दुनिया के तमाम देश उस क्षेत्र से आपूर्ति किए जाने वाले उर्वरकों और कच्चे माल पर बहुत अधिक निर्भर हैं। युद्ध में आपसी संबंधों से उत्पन्न होने वाली कमजोरियां उजागर हो जाती हैं।
चार साल पहले, जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तो दुनिया को कृषि भूगोल का एक सबक मिला। दोनों देश गेहूं और अन्य अनाजों के महत्वपूर्ण स्त्रोत थे। इस युद्ध के बाद पश्चिम अफ्रीका से लेकर दक्षिण एशिया तक खाद्यान्न की कमी जल्द ही देखने को मिली।
पश्चिम एशिया में हालिया उथल-पुथल से अनाज की कटाई पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन उर्वरकों पर इसका प्रभाव कहीं अधिक गहरा हो सकता है। कमोडिटी पर केंद्रित समाचार और डाटा सेवा आर्गस मीडिया की संपादक सारा मार्लो ने कहा कि इस बार उर्वरकों पर असर रूस-यूक्रेन संघर्ष की तुलना में कहीं अधिक होने की आशंका है।
Edited by k.s thakur...




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