Budget 2026 : रक्षा बजट 15% बढ़ा: टैक्स में नहीं कोई बदलाव, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर समेत 3 आयुर्वेदिक AIIMS; बजट में क्या रहा खास?

Budget 2026 : रक्षा बजट 15% बढ़ा: टैक्स में नहीं कोई बदलाव, 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर समेत 3 आयुर्वेदिक AIIMS; बजट में क्या रहा खास?


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 का बजट पेश किया, जिसमें आम आदमी को सीधी राहत नहीं मिली। मुख्य फोकस रक्षा, स्वास्थ्य और रेलवे पर रहा। रक्षा बजट में 15.2% की वृद्धि हुई। कैंसर और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर कस्टम ड्यूटी हटाई गई। 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और 3 आयुर्वेदिक AIIMS की घोषणा हुई। टैक्स फाइलिंग आसान की गई और ईवी को बढ़ावा देने के लिए टैक्स छूट दी गई।

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नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में साल 2026-27 का आम बजट पेश किया। वे करीब 85 मिनट तक बजट भाषण देती रहीं, लेकिन आम आदमी के लिए कोई सीधी बड़ी राहत का ऐलान नहीं किया। हालांकि टैक्स फाइलिंग को आसान बनाने, रेलवे, स्वास्थ्य और रक्षा क्षेत्र में खर्च बढ़ाने पर सरकार का खास फोकस रहा।

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वित्त मंत्री इस दौरान तमिलनाडु की पारंपरिक कांजीवरम साड़ी पहनकर लोकसभा पहुंचीं। इसी साल पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होने हैं, लेकिन बजट में कोई सीधा चुनावी ऐलान नहीं किया गया।

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पेश हुए इस पहले बजट में सरकार ने जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों का जिक्र किया और देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी की।

रक्षा और सुरक्षा पर जोर..

सरकार ने रक्षा बजट को 6.81 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। यानी कुल रक्षा बजट में 15.2% की बढ़ोतरी हुई है।

हथियारों की खरीद और सेना के आधुनिकीकरण पर खर्च 1.80 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2.19 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो 22% ज्यादा है। इसके अलावा विमान और एयरो इंजन डेवलपमेंट के लिए 64 हजार करोड़ रुपये, नौसेना के लिए 25 हजार करोड़ रुपये और पेंशन के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये रखे गए हैं।

टैक्स और रिटर्न फाइलिंग..

इनकम टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि टैक्सपेयर्स को राहत देते हुए रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने की समयसीमा बढ़ा दी गई है।

अब टैक्स रिटर्न 31 दिसंबर के बजाय 31 मार्च तक रिवाइज किया जा सकेगा। नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा और रिटर्न फॉर्म को आसान बनाया गया है, ताकि आम लोग इसे आसानी से भर सकें।

स्वास्थ्य और आयुर्वेद..

कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 17 आयातित दवाओं पर से 5% कस्टम ड्यूटी हटा दी गई है। इससे इलाज सस्ता होगा। हीमोफीलिया, सिकल सेल और मस्कुलर डिस्ट्रॉफी जैसी 7 दुर्लभ बीमारियों की दवाएं भी ड्यूटी फ्री होंगी।

सरकार ने 3 आयुर्वेदिक AIIMS खोलने का ऐलान किया है। साथ ही भारत को ग्लोबल बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी है। अगले 5 साल में एक लाख हेल्थकेयर प्रोफेशनल तैयार किए जाएंगे।

रेलवे, शिक्षा और महिलाएं..

देश में 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाए जाएंगे, जिनमें मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं।15 हजार सेकेंडरी स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब बनाई जाएंगी। देश के 789 जिलों में लड़कियों के लिए हॉस्टल बनाए जाएंगे। हर जिले में कम से कम एक हॉस्टल होगा।

ग्रीन एनर्जी, खेती और रोजगार..

लिथियम-आयन बैटरी और बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम से जुड़े उपकरणों पर टैक्स छूट बढ़ाई गई है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन सस्ते हो सकते हैं। खेती, पशुपालन और मछली पालन से जुड़े रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया गया है। नारियल, काजू-कोको, चंदन उद्योग और हैंडलूम सेक्टर को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार की कमाई और घाटा..

  • सरकार का लक्ष्य है कि 2030-31 तक कुल कर्ज GDP के 50% के आसपास लाया जाए।
  • राजकोषीय घाटा 4.4% से घटकर 4.3% करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • पिछले साल सरकार की कमाई ₹34 लाख करोड़ रही, जबकि खर्च ₹49.6 लाख करोड़ था।
  • 2026-27 में कमाई ₹36.5 लाख करोड़ और खर्च ₹53.5 लाख करोड़ रहने का अनुमान है। अंतर पूरा करने के लिए सरकार ₹11.7 लाख करोड़ का कर्ज लेगी।

ऑपरेशन सिंदूर से पहले कितना था बजट?

ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहले बजट में सरकार ने रक्षा आवंटन में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसे देश की सीमाओं पर कायम दोहरी सामरिक चुनौतियों का अहसास है। बजट में रक्षा खर्च के लिए 7.84 लाख करोड़ रुपये से अधिक का आवंटन किया गया है, जो वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 में आवंटित 6.81 लाख करोड़ रुपये की तुलना में एक लाख तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक है।

इसमें रक्षा क्षेत्र के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत आवंटन का हिस्सा भी शामिल है। रक्षा पूंजीगत आवंटन की यह बढ़ोतरी पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है, जिसके जरिये तीनों सेनाओं के हथियारों, उपकरणों तथा अन्य सैन्य साजो-समान की खरीद की जाएगी। इसका बड़ा हिस्सा लड़ाकू जेट विमानों और एयरो इंजनों की खरीद तथा नौसेना की पोत-पनडुब्बियों की फ्लीट के निर्माण पर खर्च होगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीमा पर गहराती सामरिक चुनौतियों तथा ऑपरेशन सिंदूर के सामरिक अनुभवों के परिप्रेक्ष्य में 2026-27 के लिए कुल 7,84,678 करोड़ रुपये का रक्षा आवंटन किया है। यह 2025-26 के संशोधित बजट आवंटन 6,81,210 करोड़ की तुलना में एक लाख तीन हजार करोड़ रुपये ज्यादा है।

कितनी है पेंशन की हिस्सेदारी?

इसमें राजस्व आवंटन खर्च 5,53,668 करोड़ रुपये का है, जिसमें पेंशन की 1,71,338 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी शामिल है। पेंशन के लिए आवंटित यह राशि मौजूदा वित्तीय वर्ष के 1.60 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 11 हजार करोड़ रुपये अधिक है। तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए 1.85 लाख करोड़ रुपये रखा गया है। रक्षा बजट का यह आवंटन देश के जीडीपी का करीब दो प्रतिशत तथा कुल बजट का 11 प्रतिशत है।

बजट में रक्षा पूंजीगत खर्च की आवंटित कुल राशि 2,19,306 करोड़ रुपये 2025-26 के संशोधित पूंजीगत खर्च 1,86,454 करोड़ की तुलना में करीब 34,000 करोड़ रुपये अधिक है। इस पूंजीगत आवंटन के तहत एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन हासिल करने के लिए 63,733 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। नेवी फ्लीट निर्माण को पूरा करने के लिए 25,023 करोड़ रुपये दिए गए हैं।

पूंजीगत खरीद के तहत अगली पीढ़ी के फाइटर एयरक्राफ्ट, स्मार्ट और घातक हथियार, जहाज-पनडुब्बी, मानवरहित हवाई वाहन, ड्रोन, स्पेशलिस्ट वाहन आदि हासिल किए जाएंगे। सेनाओं के आधुनिकीकरण और उनकी नियमित जरूरतों को पूरा करने और आपरेशन ¨सदूर के बाद हथियार तथा गोला-बारूद की आपातकालीन खरीद पर भी यह रकम खर्च होगी।

राजनाथ ने कहा- आवंटन में वृद्धि से सैन्य क्षमता सशक्त होगी..

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का प्रविधान किए जाने पर प्रधानमंत्री का हृदय से आभार। ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद आए इस बजट ने देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के हमारे संकल्प को और सुदृढ़ किया है।

इस वर्ष हमारी सेनाओं के कुल पूंजीगत खर्च के लिए 2.19 लाख करोड़ का प्रविधान किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण पक्ष हमारी तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण का है। इसके लिए इस वर्ष 1.85 लाख करोड़ रुपये का प्रविधान किया गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि के परिणामस्वरूप हमारी सैन्य क्षमता और अधिक सशक्त होगी।

7 हाई-स्पीडर रेल कॉरिडोर का एलान..

केंद्र सरकार देश के प्रमुख शहरों और आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए बजट में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है, जिसका सीधा लाभ यात्रियों को कम समय, बेहतर सुविधा और भरोसेमंद कनेक्टिविटी के रूप में मिलेगा।

इस कॉरिडोर से देश का ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर पूरी तरह बदल जाएगा। साथ ही परोक्ष रूप से आसपास के क्षेत्रों में निवेश, रोजगार में वृद्धि के साथ शहरी विकास को भी गति मिलेगी। नए हाई-स्पीड रेल गलियारों में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बेंगलुरु, दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी शामिल हैं।

अश्विनी वैष्णव ने क्या कहा?

बजट के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आत्मविश्वास के साथ मीडिया को बताया कि केंद्रीय बजट में भारतीय रेलवे के लिए 2.78 लाख करोड़ रुपये के प्रविधान के साथ सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा न केवल तेज यात्रा का वादा करती है, बल्कि यात्रियों की सुविधा, हरित परिवहन, क्षेत्रीय विकास और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार देने की स्पष्ट रणनीति भी पेश करती है।

उन्होंने बताया कि करीब चार हजार किलोमीटर लंबाई वाले इन सातों कॉरिडोर पर लगभग 16 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा। रेल मंत्री के अनुसार सबसे अहम बदलाव यात्रा समय में भारी कमी है। मुंबई से पुणे का सफर महज 48 मिनट में पूरा हो सकेगा, जिससे दोनों शहर लगभग एक आर्थिक क्षेत्र की तरह जुड़ जाएंगे।

पुणे से हैदराबाद की दूरी एक घंटा 55 मिनट में सिमट जाएगी। दिल्ली से वाराणसी का सफर मात्र 3 घंटे 50 मिनट में तय किया जा सकेगा, जबकि वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक की दूरी लगभग दो घंटे 55 मिनट में पूरी हो जाएगी।

आयुर्वेद को बड़ा बूस्ट..

कोरोना काल के बाद दुनिया में भारतीय आयुर्वेदिक दवाओं की स्वीकार्यता बढ़ी है और इसके साथ ही उनकी मांग भी बढ़ती जा रही है। यह किसानों और युवाओं के लिए आय और रोजगार के अवसर भी बढ़े है।

इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए बजट में कई घोषणाएं की गई हैं। जिनमें तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने से लेकर साक्ष्य आधारित अनुसंधान औरआयुष फार्मेसी व आषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन शामिल है।

तीन नए संस्थान होंगे स्थापित..

मोदी सरकार ने आयुष के लिए अलग से विभाग बनाने के बाद एम्स की तर्ज पर आयुर्वेदिक चिकित्सा के लिए दिल्ली में पहला अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किया था। अब इसी तर्ज तक तीन नए संस्थान स्थापित किए जाएंगे। आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग बावजूद इलाज में उनकी उपयोगिता को लेकर सवाल उठाए जाते हैं।

इस कमी को दूर करने के लिए सरकार ने पारंपरिक दवाओं के लिए साक्ष्य आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने का फैसला किया है। जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र का उन्नयन कर वहां पारंपरिक दवाओं पर साक्ष्य आधारित अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ केंद्र पारंपरिक दवाओं के निर्माण में प्रशिक्षण और उसके जागरूकता बढ़ाने का भी काम करेगा।




Edited by k.s thakur...

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