'Gen-Z' विद्रोह के बाद सत्ता की नई जंग, क्या बदलेगी बांग्लादेश की किस्मत?
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाला आम चुनाव 'जेन-जी प्रेरित' बताया जा रहा है। 15 साल बाद शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह पहला प्रतिस्पर्धी चुनाव है, जिसमें तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी प्रबल दावेदार है। युवा मतदाता जमात-ए-इस्लामी का समर्थन कर रहे हैं, जिससे भारत का प्रभाव घट रहा और चीन का बढ़ रहा है।
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नई दिल्ली। बांग्लादेश में 12 फरवरी (गुरुवार) को होने जा रहा आम चुनाव न केवल देश के भविष्य के लिए निर्णायक है, बल्कि इसे दुनिया का पहला 'जेन-जी प्रेरित चुनाव' भी कहा जा रहा है।
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2009 से 15 साल तक सत्ता पर काबिज रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पतन के बाद यह पहला अवसर है, जब देश में एक प्रतिस्पर्धी चुनाव देखने को मिल रहा है। जहां कभी अवामी लीग का 'नौका' चिह्न हावी रहता था, आज वहां सड़कों पर मुख्य विपक्षी दल बीएनपी का 'धान का गुच्छा' और जमात-ए-इस्लामी का 'तराजू' दिखाई दे रहा है।
तारिक रहमान बने जीत के प्रबल दावेदार..
सत्ता का नया समीकरण और युवा शक्ति, हसीना की अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद, खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को जीत का प्रबल दावेदार माना जा रहा है।
बीएनपी 300 में से 292 संसदीय सीटों पर चुनाव लड़ रही है। रहमान ने विश्वास जताते हुए कहा, 'हमें सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें जीतने का पूरा भरोसा है।'
हालांकि, इस बार मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। 'जेन-जी' यानी 30 वर्ष से कम उम्र के युवाओं ने, जिन्होंने 2024 के विद्रोह में मुख्य भूमिका निभाई थी, अपना समर्थन जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को दिया है।
देश के 12.8 करोड़ मतदाताओं में से लगभग एक चौथाई युवा हैं, जिनका रुख चुनाव परिणाम तय करने में किंगमेकर की भूमिका निभाएगा।
क्षेत्रीय भू-राजनीति: भारत बनाम चीन का प्रभाव..
शेख हसीना के शासन को भारत समर्थक माना जाता था, लेकिन उनके देश छोड़ने और नई दिल्ली में शरण लेने के बाद बांग्लादेश में भारत का प्रभाव कम होता दिख रहा है। इसके विपरीत, बीजिंग का प्रभाव बढ़ता नजर आ रहा है।
जमात-ए-इस्लामी और उसके 'जेन-जी' सहयोगियों ने नई दिल्ली के प्रभुत्व पर चिंता जताई है और हाल ही में चीनी राजनयिकों से मुलाकात की है।
विश्लेषकों का मानना है कि जमात के सत्ता में आने से बांग्लादेश का झुकाव पाकिस्तान और चीन की ओर बढ़ सकता है। तारिक रहमान ने कूटनीतिक रुख अपनाते हुए कहा है कि उनकी सरकार उन सभी देशों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखेगी जो मेरे लोगों और देश के लिए उपयुक्त प्रस्ताव देंगे।
कई समस्याओं से जूझ रहा बांग्लादेश..
आर्थिक चुनौतियां और भ्रष्टाचार मुख्य मुद्दा 17.5 करोड़ की आबादी वाला यह देश वर्तमान में उच्च मुद्रास्फीति, गिरते विदेशी मुद्रा भंडार और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
ढाका स्थित 'सेंटर फॉर गवर्नेंस स्टडीज' के परवेज करीम अब्बासी के अनुसार, मतदाता धार्मिक मुद्दों के बजाय भ्रष्टाचार, अर्थव्यवस्था और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रहे हैं।
21 वर्षीय फर्स्ट टाइम वोटर मोहम्मद राकिब की भावनाएं पूरे देश की युवाओं की सोच को दर्शाती हैं - 'लोग हसीना के शासन से थक चुके थे, जहां अभिव्यक्ति की आजादी नहीं थी। हमें उम्मीद है कि जो भी सत्ता में आएगा, वह हमें बोलने और स्वतंत्र रूप से वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करेगा।'
अब देखना यह होगा कि 12 फरवरी का फैसला बांग्लादेश को स्थिरता की ओर ले जाता है या एक खंडित जनादेश देश की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति को और अधिक जटिल बना देता है।(समाचार एजेंसी रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
Edited by k.s thakur...




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