MH news : महाराष्ट्र की राजनीति के 'महाचाणक्य' बनकर उभरे फडणवीस... कैसे दिलाई बीजेपी को इतनी बड़ी जीत?
देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र की राजनीति के 'महाचाणक्य' बनकर उभरे हैं। उन्होंने 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव में भाजपा को सबसे बड़ी पार्टी बनाया और उद्धव ठाकरे से बीएमसी छीनी।
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उनकी दूरगामी रणनीतियों ने शिवसेना और राकांपा में टूट कराई, जिससे भाजपा फिर सत्ता में आई। 2024 में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनकर उन्होंने महायुति की जीत सुनिश्चित की, लोकलुभावन योजनाओं से विपक्ष के कार्डों को बेअसर किया।
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मुंबई। महाराष्ट्र में 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणामों ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति का महाचाणक्य साबित कर दिया है।
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राज्य में कभी शिवसेना के छोटे भाई की भूमिका में चलनेवाली भाजपा को उन्होंने न सिर्फ पूरे महाराष्ट्र की सबसे अधिक जनाधार वाली पार्टी बना दिया है। बल्कि 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्हें धोखा देकर कांग्रेस और राकांपा के साथ सरकार बनानेवाले उद्धव ठाकरे से उनका बीएमसी का किला भी छीन लिया है।
फडणवीस की रणनीति आई काम..
महाराष्ट्र की सियासत में जब-जब हलचल तेज होती है, एक चेहरा पूरी शिद्दत के साथ उभरता है -देवेंद्र गंगाधरराव फडणवीस का। कभी नागपुर के सबसे युवा मेयर रहे फडणवीस आज न केवल भाजपा के 'संकटमोचक' हैं, बल्कि राज्य की राजनीति के सबसे बड़े खिलाड़ी के रूप में स्थापित हो चुके हैं।
हालिया घटनाक्रमों और 2024 के विधानसभा चुनाव परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि उनके बिना महाराष्ट्र की सत्ता का समीकरण अधूरा है। देवेंद्र फडणवीस की राजनीतिक यात्रा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुशासित कार्यकर्ता से शुरू हुई थी।
नागपुर विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई और बर्लिन से बिजनेस मैनेजमेंट की बारीकियां सीखने वाले फडणवीस ने महज 27 साल की उम्र में नागपुर के मेयर बनकर सबको चौंका दिया था।
कैसा रहा फडणवीस का सियासी सफर..
1999 में पहली बार विधायक बनने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी बौद्धिक क्षमता और विधायी बारीकियों पर पकड़ ने उन्हें बहुत जल्द दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व का विश्वासपात्र बना दिया।
साल 2014 में जब वे महाराष्ट्र के पहले भाजपाई मुख्यमंत्री बने, तो किसी ने नहीं सोचा था कि एक ब्राह्मण नेता मराठा बहुल राजनीति में अपनी इतनी गहरी पैठ बना लेगा।
2019 के चुनावों के बाद सत्ता के समीकरण बदले और भाजपा को विपक्ष में बैठना पड़ा। उस दौरान 'मी पुन्हा येईन' (मैं फिर वापस आऊंगा) का उनका नारा विरोधियों के लिए उपहास का विषय बना, लेकिन फडणवीस ने इसे एक मिशन बना लिया।
महाविकास आघाड़ी सरकार के दौरान उन्होंने 'शैडो सीएम' की भूमिका निभाई और लगातार भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाकर सरकार को घेरे रखा। 2022 में शिवसेना और 2023 में राकांपा में हुई बड़ी टूट के पीछे फडणवीस की दूरगामी रणनीति मानी जाती है, जिसने भाजपा को फिर से सत्ता की दहलीज पर ला खड़ा किया।
तीसरी बार बने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ..
दिसंबर 2024 में फडणवीस ने तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रचा। महायुति गठबंधन (भाजपा, शिवसेना-शिंदे और राकांपा-अजित पवार) की इस प्रचंड जीत का मुख्य श्रेय फडणवीस की चुनावी व्यूह रचना को दिया गया।
उन्होंने न केवल सहयोगी दलों के साथ तालमेल बिठाया, बल्कि लोकलुभावन योजनाओं जैसे 'लाडकी बहिन योजना' और बुनियादी ढांचे के विकास को चुनावी मुद्दा बनाकर विपक्ष के मराठा आरक्षण और अन्य जातीय कार्डों को निष्प्रभावी कर दिया।
वर्तमान में फडणवीस महाराष्ट्र को 'ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी' बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। फडणवीस की राजनीति केवल सत्ता तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने भाजपा के कैडर को 'अजेय' होने का विश्वास दिलाया है।
चुनावी हार, अपमान और सत्ता से बाहर होने के बाद भी जिस तरह उन्होंने वापसी की, उसने उन्हें 'महाराष्ट्र का नया चाणक्य' बना दिया है। आज वे केवल एक मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के भविष्य के सबसे भरोसेमंद सूत्रधार बनकर उभरे हैं।
Edited by k.s thakur...





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