स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कैसे बन गए शंकराचार्य? प्राधिकरण ने 24 घंटे में मांगा जवाब...
मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को रोका गया था जिसको लेकर विवाद बढ़ गया है. अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लिखा इस पर 24 घंटे में जवाब मांगा है.
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Prayagraj : प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा को रोका गया था जिसको लेकर विवाद बढ़ गया है. प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर ‘शंकराचार्य’ की उपाधि का इस्तेमाल करने को लेकर सवाल उठाया है.
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बता दें कि, मौनी अमावस्या पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की शोभायात्रा रोके जाने के बाद विरोध हुआ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि, उन्हें स्नान करने से रोका गया. जबकि, प्राधिकरण ने कहा कि उन्हें स्नान से नहीं रोका गया, बल्कि पहिया लगी पालकी उन्होंने आपत्ति जताई थी.
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स्नानार्थियों की भीड़ को देखते हुए रोकी गई शोभायात्रा..
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट कर बताया कि, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को स्नान करने से नहीं रोका गया था. आपत्ति सिर्फ पहिया लगी पालकी पर थी, जिस पर सवार होकर संगम नोज तक जाना चाहते थे. उस समय संगम नोज पर स्नानार्थियों की भारी भीड़ जमा थी ऐसे में पहिया लगी पालकी पर सवार होकर वह घाट तक जाते तो भगदड़ या कोई अनहोनी की घटना हो सकती थी. इसलिए इसको लेकर आग्रह किया गया. इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया.
धरने पर बैठे हैं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद..
माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को रोकने के बाद विवाद बढ़ गया है. इसके बाद से वह धरने पर बैठे हैं. उनका कहना है कि, वह खुद के अपमान और शिष्यों के साथ पुलिस की अभद्रता के विरोध में मेला प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे हैं. जबकि, प्रशासन का कहना है उन्हें स्नान से नहीं रोका गया सिर्फ पहिया लगी पालकी पर सवार होकर घाट पर न जाने का आग्रह किया गया था.
इस मामले के बाद माघ मेला प्राधिकरण की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस भेजा गया है और नाम से पहले शंकराचार्य लगाने को लेकर जवाब मांगा गया है. देर रात जब अधिकारी नोटिस लेकर पहुंचे तो समर्थकों ने यह कहते हुए उन्हें वापस लौटा दिया कि, नोटिस रिसीव करने के लिए कोई पदाधिकारी नहीं है. इसके बाद नोटिस को शिविर के बाहर चिपका दिया गया.
नाम के आगे शंकराचार्य कैसे लिखा? प्राधिकरण ने मांगा जवाब..
मौनी अमावस्या पर हुए इस पूरे विवाद के बाद अब प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर नाम के आगे शंकराचार्य क्यों लिखा इस पर 24 घंटे में जवाब मांगा है. इस पत्र में ब्रह्मलीन ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के लंबित मुकदमे का जिक्र है.
बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट के 2022 के आदेश के अनुपालन के तहत ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के पद पर पट्टाभिषेक पर रोक है. इस समय ज्योतिष पीठ पर कोई धर्माचार्य शंकराचार्य के रूप में पट्टाभीषेकित नहीं है. ऐसे में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर के बोर्ड पर नाम के आगे शंकराचार्य पद का प्रयोग किया गया है.
Edited by k.s thakur...





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