MP news : बोट हादसा,फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक का बना था क्रूज, दो वर्ष पूर्व हुआ था पूर्ण रखरखाव...
जबलपुर : बरगी बांध में डूबा कू्ज फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) का था। क्रूज का दो वर्ष जुलाई, 2024 में पूर्ण रखरखाव किया गया था। इस क्रूज को वर्तमान में देश में प्रचलित क्रूजों में सबसे सुरक्षित माना जाता है।
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इसके बावजूद तेज हवा और पानी की लहरों के भार को वह सहन नहीं कर सका। चंद मिनटों के अंदर डूब गया।जबलपुर के पास बरगी बांध में हुई इस घटना ने क्रूज की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़ कर दिए है। तभी लहरों के बीच वह डूब गया था।
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क्रूज का संचालन बरगी बांध से होता है। क्रूज क्रय करने की प्रक्रिया और संचालन को लेकर व्यवस्था पर्यटन विभाग मुख्यालय अपने स्तर पर करता है। जिस क्रूज में हादसा हुआ इसे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने लिया था, 19 वर्ष से लगातार चल रहा था।
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क्रूज की 80 यात्री क्षमता थी। लोअर डेक एयर कंडीशनर था, जिसमें 30 यात्री सवार हो सकते थे। अपर डेक (खुला) की क्षमता 50 यात्रियों की थी।
एमपीटी के कमांडर राजेंद्र निगम ने बताया कि यह क्रूज हैदराबाद बोट क्लब से खरीदा गया था। संबंधित कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी है। यह क्रूज कैटामारन हाल तकनीक से बना था, जिसमें दो बोट को जोड़कर एक बड़ी बोट बनाई जाती है।
यह क्रूज की वर्तमान में देश में प्रचलित आधुनिक तकनीक में से एक बताई जा रही है। दो बोट को जोड़कर बनाए जाने वाले शिप का संतुलन पानी में बेहतर होता है। इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
फाइबर रिनइनफोर्स प्लास्टिक सामग्री के उपयेाग के कारण इसमें जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता है।इस क्रूज की आयु 30 वर्ष होती है। बेहतर रखरखाव और जांच के बाद 10 वर्ष का अतिरिक्त विस्तार संभव होता है। नियमानुसार इस क्रूज का प्रत्येक वर्ष रखरखाव होता है।
बरगी में वर्षाकाल में जब संचालन प्रतिबंधित होता है, तब इसका सालाना रखरखाव करते थे।क्रूज का प्रत्येक 9 से 10 वर्ष में मीडिया रिफीट करना होता है। मीडिया रिफीट में क्रूज को पानी से बाहर लाकर उसका पूर्ण परीक्षण किया जाता है। उसकी बाडी, एक-एक कलपुर्जे की जांच की जाती है।
संपूर्ण रखरखाव एवं मरम्मत कार्य किया जाता है। दो वर्ष पूर्व किए गए मीडिया रिफीट के दौरान जांच में क्रूज के कुछ कलपुर्जो सहित इंजन को भी बदला गया था। इसके बाद पेंट करके उसे दोबारा बांध में उतारा गया था।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब क्रूज राइड पर निकला था तो मौसम सामान्य था।
जब वह सफर पर आधी दूरी में पहुंचा तभी हवा तेज हो गई। क्रू केप्टन ने क्रूज को मोड़कर वापस लाना चाहा, लेकिन तभी तेज हवा और बांध के पानी में उठती लहरों से क्रूज डगमगाने लगा। लहरे लगातार क्रूज को ढकेल रही थी।बताया जा रहा है कि तेज लहरों के कारण क्रूज का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ।
जहाज को आगे बढ़ाने और उसे घुमाने वाले प्रापेलर्स को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।आशंका है कि लहर ने क्रूज को नीचे की ओर खींचा और दूसरी लहर से उसे उफर उठाया।इसी दौरान वह पलटा और डूब गया। क्रूज में अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी।घटनाक्रम तेजी से घटा। क्रूज में मौसम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं था।
Edited by k.s thakur...





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